Saturday, June 2, 2007

AN OPEN LETTER TO CHIEF MINISTER, CHHATTISGARH

To
Dr. Raman Singh
Chief Minister
State government of Chhattisgarh
Raipur, Chhattisgarh


Dear Chief Minister

I am deeply concerned about the latest incident of police brutality taking place in Surguja during 23 and 25 May 2007. The police’s lathicharge against innocent villagers and peaceful protesters including old persons and women must be condemned.

The statement given by you after the event do suggest that you are defending the use of brutal force against innocent people. Brutality done by the police force in a civil society cannot be appreciated. Beating innocent people, smashing them to the ground and pulling their hair can’t be accepted in a democratic society. The attack on the villagers seeking justice for the death of Vijay Debnath can’t be justified. Your statements raise the question how can a person of your status and power defend the police in this particular case? The explanations given by you do not correspond with the statements of the villagers and the footage seen on TV.

As a consequence of this incident you ordered the conducting of a magistrate inquiry. How many magistrate inquiries have you ordered over the last three years? Please let the people know what were the outcomes of these inquiries. The officers responsible for misbehavior must be punished in every case. The results of these processes could help to build a certain degree of confidence in the police forces and the ministerial administration. It is essential that you don’t try to hide facts during the investigation and that you don’t use this investigation as a fig leaf. The culpable officers involved must be punished according to the laws.

The events in Surguja proves that either the government of Chhattisgarh lost control over its police forces or that the government is deliberately accepting or even ordering the use of brutal force against innocent people. In either case you must be aware that such a situation is not in any kind appropriate for a democratically elected government.

The creation of the state of Chhattisgarh was connected with the hope of bringing democratic rights to the people. The repressive actions by the Chhattisgarh police forces are way too numerous since the invention of the Chhattisgarh state. The recurrent incidents of police brutality do not fulfill any kind of democratic standards and it lies within your responsibility to change this unsatisfactory situation. I might add that not only in the Surguja incidence the victims of the oppressive police actions include older people, unarmed women and tribal people.

Recently the Supreme Court of India has directed all the States and Union Territories to conduct a police reform. As this latest incident shows the police force of Chhattisgarh is definitely in the need of a change to the better. Still, no action was taken yet. If there is an adequate explanation for not starting the process immediately please let it be known. The creation of such a violent environment cannot be continued. The people of Chhattisgarh do know how to make their opinion and will act according to it.

Sincerely


Subash Mohapatra
A Concerned Citizen

(This letter writer is a human rights activist and associated with the Forum for Fact-finding Documentation and Advocacy)

Sunday, May 27, 2007

कांग्रेस उच्च स्तरीय जांच दल वापस लौट गया

रायपुर । पोंजेर मुठभेड़ कांड की जांच के लिए आया कांग्रेस का उच्च स्तरीय दल हालांकि वापस लौट गया है। घटनास्थल तक जांच दल के सदस्य न पहुंचें इसके लिए काफी प्रयास किए गए। संभवत: इसका आभास जोगी समर्थकों को हो गया था। रणनीति के तहत आधा दर्जन से अधिक विधायकों के अंतिम समय में जांच दल के साथ जाने की खबर लगते ही विरोधी खेमा भौंचक्क रह गया। जिसके कारण जांच दल के सदस्य घटनास्थल तक पहुंचने में सफल रहे।
जांच दल के सदस्य प्रदेश कांग्रेस व नेता प्रतिपक्ष के रवैये से आश्चर्यचकित थे। कर्मा समर्थक दंतेवाड़ा कांग्रेस कमेटी के महामंत्री व ठेकेदार अजयसिंह द्वारा किए गए व्यवहार से भी जांच दल के सदस्य काफी क्षुब्ध बताए जाते हैं। नेता प्रतिपक्ष की गलतबयानी व चुनाव के नाम पीसीसी द्वारा जो बेरुखी अपनाई गई है, उसका जिक्र भी जांच दल रिपोर्ट में कर सकता है।
बीजापुर जिले के पोंजेर ग्राम में फर्जी मुठभेड़ की शंका होने पर जांच के लिए कांग्रेस हाईकमान ने पांच सदस्यीय दल यहां भेजा था। उच्च स्तरीय दल 23 मई को रायपुर पहुंचा। इसके पूर्व से ही कांग्रेस के एक धड़े ने ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया था। अपरान्ह बारह बजे राजधानी पहुंचने के बाद दल के सदस्यों को नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा के निवास पर ले जाया गया। बताया जाता है कि यहां पर उनके दोपहर भोजन की व्यवस्था थी। महेन्द्र कर्मा द्वारा जांच दल के सदस्यों को वहां चल रहे सलवा-जुडूम व नक्सलियों द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी गई। उन्हें यह भी बताया गया कि पोंजेर में फर्जी मुठभेड़ की बात सही नहीं है। बताया जाता है कि इस दौरान जांच दल के सदस्यों को यह आभास हो गया कि उन्हें बेवजह यहां रोका जा रहा है। जांच दल के सदस्य यदि देर से पहुंचते तो संभवत: धमतरी, कांकेर, चारामा व जगदलपुर के कांग्रेसजन व अन्य लोग उनसे मुलाकात नहीं कर पाते। जांच दल जब भैरमगढ़ पहुंचा इस दौरान अजयसिंह नामक ठेकेदार जिसे दंतेवाड़ा कांग्रेस कमेटी का महामंत्री बताया जा रहा है, उसके द्वारा सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। अजय सिंह को महेन्द्र कर्मा व सलवा-जुडूम समर्थक बताया जाता है। उस पर राहत कार्य में गड़बड़ी का भी आरोप है। पोंजेर थाने में भी जांच दल को सही जानकारी नहीं मिली। सरपंच भी इस दौरान नदारत था। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी जांच दल के साथ पूरी तरह से दूरी बनाए रखे हुए थे। संगठन की ओर से गुरुमुख सिंह होरा को बतौर प्रतिनिधि बनाकर भेजा गया था। इसके अलावा बीजापुर के विधायक व जिलाध्यक्ष कवासी लखमा ही जांच दल के साथ पूरे समय तक मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार विधानसभा उप चुनाव के नाम पर प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारी जिस तरह से बेरुखी दिखाई है उससे जांच दल के सदस्य खफा बताए जाते हैं। सलवा-जुडूम को लेकर कांग्रेस दो गुटों में बंटी है। नेता प्रतिपक्ष महेन्द्र कर्मा इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी व उनके समर्थक विधायक पूरी तरह से इसका विरोध कर रहे हैं। इसके पूर्व भी हाईकमान ने बस्तर के लिए जांच दल भेजा था। उस समय भी दल को काफी दिक्कतें आई थीं। इस बार जोगी समर्थक विधायकों ने रणनीति के तहत काम किया। जांच दल के सदस्य जब नेता प्रतिपक्ष के निवास पर पहुंचे, इस दौरान आधा दर्जन जोगी समर्थक विधायक भी वहां मुलाकात करने गए थे। तब तक जांच दल व सलवा-जुड़ूम के समर्थकों को इसकी भनक नहीं थी कि पूर्व गृहमंत्री नंदकुमार पटेल की अगुवाई में विधायकों का दल भी उनके साथ जा रहा है, यहीं पर विरोधी खेमा मात खा गया और जांच दल घटनास्थल तक पहुंचने में सफल रहा।

(source: deshbandhu may 27)

Friday, May 25, 2007

पुलिस के जवानों ने की आदिवासियों की हत्या!

पोंजेर हादसे का जायजा लेकर वापस लौटी कांग्रेस की टीम
जांच रिपोर्ट सोनिया को सौपेंगे

रायपुर । नवगठित बीजापुर जिले के पोंजेर क्षेत्र में वर्दीधारी लोगों ने 6 आदिवासियों की हत्या की है। प्रत्यक्षदर्शी व पुलिस अफसरों के बयान से यह सही प्रतीत हो रहा है कि पोंजेर के संतोषपुर गांव में पुलिस के जवानों ने ही आदिवासियों की नृशंस हत्या फर्जी मुठभेड़ के नाम पर की है। इसकी जांच रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपकर इस मामले की जांच राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से कराने की अनुशंसा जांच टीम करेगी। पोंजेर में हुए कथित फर्जी मुठभेड़ की जांच के लिए कांग्रेस हाईकमान द्वारा गठित उच्च स्तरीय जांच टीम में शामिल श्रीमती जमुनादेवी सिंह, सुशीला तिरीया, मोरिस कूजूर, मधुसुदन मिस्त्री एवं मूलचंद मीणा ने पोंजेर के संतोषपुर का दौरा कर लौटने के बाद राजधानी के सर्किट हाऊस में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। इस जांच टीम ने बताया कि उन्होंने संतोषपुर व पोंजेर के लोगों से उन्होंने प्रत्यक्ष मुलाकात की जिसमें पता चला कि 31 मार्च 2007 को कुछ लोग महुआ बीन रहे थे कि वर्दी में सशस्त्र जवान आए और उनसे संतोषपुर का पता पूछने लगे बाद में उन्हें अपने साथ ही ले गए और कुछ दूरी पर ले जाकर उनकी हत्या कर दी इसके बाद वे गायब हो गए। इन जवानों के पीछे गए कुछ लोगों को 6 आदिवासियों की लाश अलग-अलग स्थानों पर पड़ी हुई मिली थी। जांच दल के लोगों ने मौके पर जाकर पूछताछ की तो फर्जी मुठभेड़ की बात सही निकली है? वहां के पुलिस अधिकारियों से भी चर्चा करने पर किसी ने यह नहीं कहा कि इन आदिवासियों को नक्सलियों ने मारा है।

पुलिस अफसरों व पोंजेर के ग्रामीणों से चर्चा के बाद जांच टीम ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस मामले में पुलिस की पूरी तरह संलिप्तता है उन्होंने ही निर्दोष आदिवासियों को मुठभेड़ के नाम पर मार डाला। टीम के सदस्यों ने कहा कि इस बड़े कांड के बाद भी सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है, जांच की बात तो दूर अभी तक पीड़ित परिवारों को मुआवजा भी नहीं दिया गया है। प्रदेश में आदिवासी सुरक्षित नहीं है जहां की पुलिस ही आदिवासियों की हत्या कर रही है ऐसे में भाजपा सरकार किस मुंह से नैतिकता की बात करती है। छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार में गरीब आदिवासी का जीवन सुरक्षित नहीं है। यह रिपोर्ट उनकी जांच टीम दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपेगी और इस मामले की जांच राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से कराने की सिफारिश करेगी। जांच टीम के सदस्यों ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि यहां आदिवासियों के हितों पर कुठाराघात हो रहा है। इतनी बड़ी घटना के बाद भी राज्य सरकार का एक भी मंत्री वहां दौरा करने नहीं गया और न ही किसी अधिकारियों को भेजा। एक प्रश् के जवाब में मूलचंद मीणा ने कहा कि एर्राबोर घटना की जांच रिपोर्ट उन्होंने केंद्र सरकार को सौंप दी थी जिस पर यथासंभव कार्रवाई की गई थी। उन्होंने पोंजेर में अपनी टीम का किसी भी के द्वारा विरोध करने की खबरों का खंडन किया है।

कांग्रेस को नक्सलियों की करतूत देखनी चाहिए : नेताम
गृहमंत्री रामविचार नेताम ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि कांग्रेस को नक्सलियों द्वारा निरीह आदिवासियों की हत्या किया जाना दिखाई नहीं देता क्या? इस मामले में जांच दल ने उपरी तौर पर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। उन्हें नक्सलियों की करतूत देखनी चाहिए।
जबकि राज्य सरकार व आदिवासियों की हितों पर सबसे अधिक ध्यान देते हुए राहत शिविरों के माध्यम से उनकी सुरक्षा की है। कांग्रेस को नक्सलियों की करतूत देखनी चाहिए।
(Source: Deshbandhu May 26)

Thursday, May 24, 2007

Sheonath deal slammed, no action yet


ALOK PRAKASH PUTUL

May 25, 2007

The Chhattisgarh government is dragging its feet on recommendations of the state Public Accounts Committee (pac) in the Sheonath river water supply deal in Chhattisgarh’s Rajnandgaon district.

The committee in its report tabled in the state assembly on March 16, asked the government to cancel the deal and initiate criminal action against Radius Water Ltd and the former managing directors of the Madhya Pradesh Audyogik Kendra Vikas Nigam Limited (mpakvn)— now called the Chhattisgarh Rajya Audyogik Vikas Nigam (cravn).

The committee also asked cravn to take possession of all assets associated with the Rs 9-crore project and sought to scrap the build-own-operate-transfer project within one week after the report’s submission.

It also said that the state was cheated by giving away the rights over the river’s resources to the private company on an annual lease of Re 1. “It is a major criminal conspiracy. Under pressure and allurement, the problems are being deliberately ignored by the government,” said pac chairperson Ravindra Chaubey.

pac criticised the then managing director of mpakvn, G S Mishra and chief engineer of Madhya Pradesh State Industrial Development Corporation Limited V N P Shrivastva for manipulation and forgery of documents. The committee said mpakvn had given away natural resource worth crores of rupees.

The government has not yet initiated any action. “We are studying the report and will do everything in public interest,” says Chhattisgarh chief minister Raman Singh.

Problem project
The Sheonath project, India’s first experiment with privatisation of rivers, covering a 23-km stretch of the Sheonath river, was widely criticised for its ecological and social damages.

The deal was signed on October 5, 1998, between mpakvn and Radius Water Limited, a private company. Radius was given a concession to build a barrage across Sheonath for supplying up to 30 million litres (mld) of water per day to the Borai industrial estate in Durg district.

According to the agreement and lease deed, the company would supply 40 million litres of water per day at Rs 10 for 1 cubic metre to mpakvn for distributing among industries. According to the take-or-pay clause in the deal, the government was required to stick to the price of water irrespective of any changes in the demand. This caused losses to the state since the demand for water had been lower.

Estimates suggest the corporation lost Rs 1.29 crore between December 2000 and June 2002 due to payment for water that was not drawn. In 2000, when Chhattisgarh was formed, Radius hiked the water price to Rs 12.60 per cubic metre. This met with opposition from the subscribers.

Livelihood loss
When the barrage was built in January 2001, the company prevented villagers from using the river water for irrigation, grazing and fishing. According to the villagers, the administration also backed the company. They protested and challenged the company’s claims.

The protests and the campaigns against the project prompted pac to take up the matter. On January 9, 2003, pac got permission from the speaker for a probe. Even before this, it examined the agreement and inspected the area.

Considering the protests, the then chief minister of Chhattisgarh, Ajit Jogi, decided to cancel the contract in April 2003 (see 'Deal shelved', Down To Earth, May 15, 2003). He directed Chhattisgarh’s advocate general, Chhattisgarh State Industrial Development Corporation (csidc) and the departments of water resources, public health engineering and legal affairs to take steps to immediately shelve the deal. The departments are yet to submit their reports.

The villagers still hope the pac report will pave way for a quick action. “We have given them all the facts but the government is not serious about the issue,” says Gautam Bandhopadhyay of Nadi Ghati Morcha. Subhash Mahapatra of the Forum for Fact-finding Documentation and Advocacy, an ngo who filed the petition in the high court against privatisation of the river, echoes Bandhopadhyay. “The government has not yet acted upon the recommendations in the pac report,” he says.

(Source: Down To Earth)

सरपंच ने वीडियो इंटरव्यू का खंडन किया, पत्रकारो पर आरोप

रायपुर, 23 मई (छत्तीसगढ़ )। बस्तर के संतोषपुर पंचायत के सरपंच
गंगाराम एमला का कहना है कि 'छत्तीसगढ़ ' में 18 मई के अंक में
प्रकाशित उनका साक्षा. कार पत्रकारों ने दबाव से लिया था
और उन्होने अपनी कही बातों का खंडन किया है। कल अखबारों को
जारी किए गए एक बयान में गंगाराम एमला की ओर से एक लिखित
और दस्तखत वाले बयान में कहा गया है कि उ.होंने ' छत्तीसगढ़'
में प्रकाशित कालम 'बासी म उफान'में प्रश्नोत्तर के रूप में
अपना इंटरव्यू पढ़ा और वे उसका पूरी तरह खंडन करते हैं।
उन्होने आगे कहा 'यह सच है कि लगभग एक माह पूर्व कैमरे के
सामने मेरा बयान संतोषपुर की घटना के संबंध में लिया गया था
परंतु इस तरह के बयान के लिए पत्रकारो ने मुझे डरा-धमकाकर
एवं प्रलोभन देकर मजबूर किया था।' 'अत: समाचार पत्रो में
प्रकाशित उक्त बयान र्पूणत: भ्रामक एवं असत्य है।' पाठकों को ध्यान
होगा कि इस इंटरव्यू के साथ 'छत्तीसगढ़' ने यह भी प्रकाशित किया था कि यह एक महीने से
इंटरनेट पर उपलब्ध है। इसे बीजापुर पुलिस जिला मुख्यालय
में एसपी के कार्यालय के पास दिनदहाड़े खुली जगह पर कुछ लोगों
ने वीडियो कैमरे पर रिकॉर्ड किया था। इस साक्षात्कार में
गंगाराम एमला बिना किसी दबाव के तमाम बातें बोलते दिख रहा था। '
छत्तीसगढ़' में प्रकाशन के बाद ऐसा पता लगा है कि उस पर दबाव
डालकर यह खंडन जारी करवाया गया है लेकिन इसमें उसने अपनी कही
किसी बात का खंडन नहीं किया है न ही यह कहा है कि उसका
साक्षात्कार गलत प्रकाशित किया गया था। अब वह सिर्फ अपनी
कही हुई बातों से मुकर रहा है।

Wednesday, May 23, 2007

AN OPEN LETTER ON CG SPECIAL PUBLIC SECURITY ACT

To
All Members of Legislative Assembly
Chhattisgarh Legislative Assembly
Raipur, Chhattisgarh

Dear MLAs
Jai Chhattisgarh!

Not only in Chhattisgarh, but also everywhere in the world there is a debate regarding the implementation of Chhattisgarh Special Public Security Act (CSPSA), 2005. To my knowledge this debate rises due to imprisonment of Dr. Binayak Sen, a noted human rights activist who, as a doctor, has served marginalized communities in Chhattisgarh for half of his life on their health issues. I have also seen him raising public issues of Chhattigsrh people in many appropriate national and international forums. I am also aware that over 2500 people all across the world have written DR. Raman Singh (who is publicly accepted as a liberal leader) by making their concern appeal to release Dr. Sen immediately and unconditionally.

India is a democratic country and respected worldwide for the value driven lives of its billions of people, and the tolerance and principles of our respected leader MG Gandhi. Non-violence, free-thinking and free speech are core values for all of India. But unfortunately, the Chhattisgarh Special Public Security Act (CSPSA), 2005 limits these values and principles and there are dangerous symptoms of misuse and poor implementation of the above stated act. "It gives the State Government power to notify an organization as `unlawful' without disclosing reasons for it" which is a threat to principles of natural justice.

I understand that Chhattisgarh Special Public Security Act (CSPSA), 2005 has the potential to throttle free speech, legitimate dissent and threaten the existence of civil society organisations in the State. The CSPSA provides for up to seven years' imprisonment for committing an "unlawful activity". And this "unlawful activity" has been defined loosely and imprecisely.

The definition includes committing acts, uttering words, writing or making visual representations that may "create risk or danger for public order, peace and public tranquility" or "impede the administration of law or institutions". This definition of "unlawful activities" threatens the free exercise of fundamental freedom of speech and expression and appears to restrict the right to hold public meetings, organize public protests, and oppose government policies through the media.

It is my understanding under the CSPSA any organization can be declared "unlawful" on the grounds that that it is involved in committing "unlawful activity" or if its objective is to encourage, assist, or induce the same.

The CSPSA gives the State Government the power to notify an organization as "unlawful" without disclosing reasons for the notification. Once an organization is declared "unlawful" under the Act, the State Government can seize its funds and premises, and its members can be imprisoned for up to three years. Under the Act, a person is liable for punishment even if he were a member of the organization, participated in its meetings or received contributions on its behalf before the organization was declared unlawful. So, a blanket application of this provision would lead to undue harassment of persons coerced by insurgent groups to provide sustenance and shelter to them.

I earnestly urge you all to repeal the legislation, which give the wrong signal to the international community, and free living in the state. The glorious history of Chhattisgarh witnessed many changes in the interest of the people, and I am hopeful you will come forward to meet the challenge. You are a hope and aspiration of the people, and you are learned and responsible people's leaders. Thus, again I express my confidence in you all and ask your intervention to protect and promote the Chhattisgarh's liberal culture and vibrant democracy and pluralism in the State by repealing this democracy-killer-act.

Now, the situation is rising alarmingly. You all the learned people leaders, kindly make a move to special assembly session for it and discuss. It is also required to make state debate and this state debate will make the people happy with you as you are involving them in decision making by building a new democratic culture here in Chhattisgrh. I am sure this move will set an example to other states.

I would earnestly ask all esteemed members to express their views on the daily Chhattisgarh and other media. I am hopeful like as always, that the media in Chhattisgarh will come forward to express you for the people by providing a common platform.

Sincerely


Subash Mohapatra
A concerned Citizen

(This letter writer is a human rights activist and associated with the Forum for Fact-finding Documentation and Advocacy)

कांग्रेस जांच दल को बस्तर जाने से रोकने की कोशिशें

पांच सदस्यीय दल करेगा फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच

रायपुर । फर्जी मुठभेड़ मामले की जांच करने कांग्रेस का उच्च स्तरीय दल कल रायपुर आ रहा है। इस दल को घटना स्थल तक जाने से रोकने के लिए कांग्रेस से जुड़े एक गुट के सदस्यों ने आज काफी प्रयास किया गया। इसके बावजूद जांच दल के सदस्यों ने दो टूक जवाब दे दिया है कि उन्हें पुलिस नहीं दी गई तो भी वे बस्तर क्षेत्र का जांच दल की मुखिया जमुना देवी एक दिन पूर्व आज रायपुर पहुंच गई।

पोजेंर में हुई फर्जी मुठभेड़ सहित अन्य घटनाओं में मारे गए आदिवासियों की जांच के लिए कांग्रेस हाईकमान ने जांच के लिए पांच सूत्रीय दल का गठन किया है। यह दल दंतेवाड़ा व बीजापुर क्षेत्र भी जाएगा। जांच दल के सदस्य आज 22 मई को राजधानी पहुंचने वाले थी एक दिन पूर्व पुलिस प्रमुख ओपी राठौर की अचानक हुई मौत के चलते कार्यक्रम में परिवर्तन किया गया। अब यह दिन बाद कल 23 मई को आ रहा है।

कार्यक्रम में अचानक हुए बदलाव की खबर जमुना देवी को नहीं मिल पाई। सायं 4 बजे भोपाल में जब वे टे्रन में सवार हुई तब उन्हें संशोधित कार्यक्रम की खबर मिली। जांच दल के अन्य सदस्य मधुसूदन मिस्त्री, सुशीला तिरीया, पूर्व सांसद मूलचंद मीना, नई दिल्ली से विमान द्वारा कल दोपहर रहे है, सूत्रों की माने तो इस दल को रायपुर आने से रोकने के लिए काफी प्रयास किए गए तरह-तरह के बहाने बनाए गए। उनसे कहा गया कि पुलिस प्रमुख के निधन के कारण बस्तर के वरिष्ट अधिकारी रायपुर आ गए है। एसी स्थिति में उन्हें नीचले तबके के पुलिस कर्मचारी सुरक्षा मुहैया नहीं करा पाएंगे। इसलिए कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दे। बताया जाता हे कि इसके पीछे कांग्रेस के ही एक गुट विशेष के लोगों का हाथ था ज्ञात हो कि बस्तर में चल रहे सलवा जुडूम को लेकर कांग्रेस पार्टी दो खेमो में बंट गई है, एक खेमा इसे बंद करने की लगातार मांग कर रहा है, वहीं दूसरा सलवा जुडू जारी रखने के पक्ष में है, सांसद अजीत जोगी की पहल पर कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर यह दल प्रदेश के दौरे पर आ रहा है। बीजापुर के प्रकासित परिवार के सदस्यों, कांग्रेस कार्यकताओं व अधिकारियों से मिलकर यह दल मामले की जांच करेगा। इसके बाद जांच रिपोर्ट हाईकमान को सौपी जाएगी।

(Source: deshbandhu May 23, 2007)

Chhattisgarh Police produce false evidence in High Court

Two innocent labourers killed in fake encounter

Monday, May 21, 2007

दंतेवाड़ा में फर्जी मुठभेड़ नहीं: कर्मा

रायपुर। विधानसभा में विपक्ष के नेता महेन्द्र कर्मा ने दंतेवाड़ा में पुलिस मुठभेड़ में गत सप्ताह दो निरीह एवं निर्दोष आदिवासियों को मारे जाने की खबरों को बेबुनियाद बताते हुये पुलिस को क्लीन चिट दी है।
श्री कर्मा ने आज कहा कि दंतेवाड़ा के नयापारा में पुलिस मुठभेड़ में मारे गये दोनों आदिवासी नक्सली ही थे और वहां के पुलिस अधीक्षक ने भी शिकायतों की जांच में पाया कि मारे गये दोनों लोग नक्सली थे और 1998 में हुये बम विस्फोट मामले में भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि वह इस जांच से पूरी तरह से सन्तुष्ट हैं। उन्होंने बीजापुर जिलें के पोंजेर में फर्जी मुठभेड़ के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस मामले में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चरण दास महन्त पहले ही जांच की मांग कर चुके है और वह भी जांच के पक्ष में है। मामले की जांच में जो भी सच्चाई होगी सामने आ जायेगी। उन्होंने इस मामले की जांच के लिये कांग्रेस की उच्चस्तरीय समिति के द्वारा भी आने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इसमें आखिर क्या बुराई है।
दंतेवाड़ा में दो निरीह लोगों को मुठभेड़ में मारे जाने का आरोप श्री कर्मा के धुर विरोधी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी लगा चुके हैं। इसके साथ ही राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी मुठभेड़ को संज्ञान में लेते हुये पुलिस महानिदेशक ओ.पी.राठौर को नोटिस जारी किया है। मानवाधिकार संगठनों ने भी मुठभेड़ के फर्जी होने का आरोप लगाया है और उनके नक्सली की बजाय मजदूर होने का दावा किया है।
प्रदेश युवक कांग्रेस ने भी कल ही पोंजेर एवं दंतेवाड़ा की इन कथित फर्जी मुठभे़डों की सीबीआई जांच करवाने की मांग को लेकर राजधानी में धरना प्रदर्शन एवं राज्यपाल को ज्ञापन दिया। उन्होंने बस्तर में चल रहे सलवा जुडूम अभियान को बन्द करने तथा उसके कार्यकर्ताओं द्वारा की जा रही कथित गुंडागर्दी को भी रोकने की मांग की है।
नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सलवा जुडूम अभियान की अगुवाई कर रहे श्री कर्मा ने प्रदेश युवक कांग्रेस के आन्दोलन के बारे में पूछे जाने पर कहा कि आखिर इसमें नया क्या है। जोगी समर्थक शुरू से ही इस अभियान का विरोध करते रहे हैं और उसी परिप्रेक्ष्य में ही कल का उनका आन्दोलन था। उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वह नक्सलियों के आतंक के खिलाफ शुरू लड़ाई को उसके मुकाम तक जरूर पहुंचायेंगे।

[Source: Jagran Monday, May 21, 2007 2:00:38 AM (IST) ]

कथित फर्जी मुठभेड़ की जांच के लिए कांग्रेस की समिति बस्तर में

जगदलपुर/रायपुर। नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में कथित फर्जी मुठभेड़ में सात आदिवासियों के मारे जाने की घटना की जांच के लिये कांग्रेस की दस सदस्यीय समिति कल यहां पहुंचेगी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देश पर गठित समिति के सदस्य 22 मई को मुठभेड़ स्थल पुंजेर पहुंचेंगे, जहां वे आदिवासियों और पुलिस प्रशासन से चर्चा करेंगे। समिति बस्तर अंचल में नक्सलियों के खिलाफ छेडे़ गये अभियान सलवा जुडूम के संबंध में भी आदिवासियों से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट 25 मई को पार्टी अध्यक्ष को सौंप देगी।
सूत्रों के मुताबिक समिति में गुजरात के सांसद मधुसूदन मिस्त्री के अलावा सुश्री सुशीला त्रिया , मारगेट हुजूर (झारखंड), मूलचंद मीणा (राजस्थान) और मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष की नेता जमुनादेवी भी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि 21 मार्च को नक्सली प्रभावित बीजापुर जिले के पुंजेर में कथित तौर पर फर्जी मुठभेड़ में पुलिस ने सात आदिवासियों को मार दिया था। मामला उजागर होने के बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आदिवासियों के शव जमीन से खोदकर निकाले गये थे।
[Source: Jagran Monday, May 21, 2007 2:00:38 AM (IST) ]

Sunday, May 20, 2007

हत्याएं एसपीओ पुलिस ने कीं

*भास्कर न्यूज **
*20 May 2007
*दंतेवाड़ा
*बीजापुर जिले में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में नया मोड़ आ गया है। एक वेबसाइट ने संतोषपुर के सरपंच
हेमला गंगाराम का 3 मिनट का साक्षात्कार रिलीज किया है। इसमें गंगाराम ने स्वीकार किया है कि एसपीओ ने
उसके सामने कुल्हाड़ी से 6 लोगों की हत्या की। जिला पुलिस के जवान भी साथ में थे।

सीजीनेट.इन नामक वेबसाइट पर पूरे साक्षात्कार की क्लिपिंग उपलब्ध है, हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि ये
साक्षात्कार कहां, कब और किसने लिया। वेबसाइट का प्रबंधन करने वाली संस्था ने भी यह जानकारी नहीं दी है। गंगाराम
द्वारा दिए गए बयान की ट्रांसक्रिप्ट हिंदी और अंग्रेजी में दी गई है, ताकि यहां सर्फ करने वाले व्यक्ति को लिखित में पूरा
विवरण मिल जाए।

सूत्रों का कहना है कि साक्षात्कार घटना के 78 दिन बाद बीजापुर में पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पास लिया
गया था। बस्तर रेंज के आईजी आरके विज का कहना है कि उनको इस वेबसाइट की क्लिपिंग
की जानकारी नहीं है। अब तक की जांच में किसी भी व्यक्ति ने यह बयान नहीं दिया है कि उसके सामने हत्या हुई। इस
क्लिपिंग की पुलिस जांच करवाएगी। यदि गंगाराम का बयान नहीं हुआ है, तो वह भी करवाया जाएगा।

वेबसाइट के अनुसार संतोषपुर के सरपंच का कहना है कि शाम 4.30 बजे वह पुलिस पार्टी के साथ गांव से निकला
था। रास्ते में उनको कुछ संघम सदस्य दिखे, जिनकी घेराबंदी की गई। इस बीच एक संघम सदस्य भाग गया। एक संघम सदस्य को हिरासत में लेने के बाद लौट रहे पुलिस दल को रास्ते में दूसरी पुलिस पार्टी मिल गई। पुलिस पार्टी हमें लेकर दोबारा उसी जगह पर लौटी।

चेरपाल की तरफ से आ रही एक पार्टी ने कई स्थानों पर छापेमार कर संघम सदस्यों को दबोचा और संतोषपुर के पास जंगल
में ले आए। यहां एसपीओ ने कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ हमले कर छह लोगों को मार डाला। जिला पुलिस के जवान भी उनके साथ
में थे। अपने ही गांव के लोगों को बचाने के लिए गंगाराम ने पुलिस से गुहार लगाई, लेकिन उसे चुप करा दिया गया। हत्या करने के लिए इन लोगों को संतोषपुर क्यों लाया गया, सरपंच ने इस बारे में अनभिज्ञता जाहिर की।

उसका कहना था कि इस बारे में पुलिस की दूसरी पार्टी ने फैसला किया। सरपंच ने इस बात की भी पुष्टि की है कि मारे
गए कुछ ग्रामीण महुआ बीन रहे थे। उनके पास की डलिया में ताजा तोड़ा महुआ भी था। वीडियो क्लीपिंग में
गंगाराम को यह बोलते दिखाया गया है कि मारे गए छह लोगों में एकदो महुआ बीनने जंगल में आए सामान्य
लोग थे। बाकी सारे संघम सदस्य। गौरतलब है कि भास्कर ने कथित फर्जी मुठभेड़ में 6 ग्रामीणों की हत्या का मामला
उजागर किया था।

डीजीपी ओपी राठौर के निर्देश पर बीजापुर में पदस्थ एडीशनल एसपी अंकित कुमार गर्ग पूरे मामले की जांच कर रहे
हैं। प्रारंभिक जांच के बाद कुछ अज्ञात वर्दीधारियों के खिलाफ हत्या का आरोप कायम किया गया है। ये वर्दीधारी पुलिस
जवान थे या नक्सली एफआईआर में साफ नहीं है। श्री गर्ग ने हाल में बताया था कि ये सारे तथ्य जांच में सामने
आएंगे।

संतोषपुर : कितने "अज्ञात" हैं ये "वर्दीधारी" ?

शुभ्रांशु चौधरी

पिछले 13 अप्रैल को मैंने इसी कॉलम में बीजापुर जिले के संतोषपुर में हुए मेरे अनुभव के बारे में लिखा था "नक्सली –पुलिस एनकाउंटर का देहाती वर्ज़न" .

बीजापुर के एसपी ने यह बयान दिया था कि 31 मार्च को संतोषपुर में नक्सली पुलिस मुठभेड में 6 आदिवासी मारे गए थे
जबकि उसी ग्राम के ग्रामीणों ने मुझसे कहा था कि पुलिस और एसपीओ ने उनके गांव में 12 लोगों को मार दिया था

किसी भी ग्रामीण ने पुलिस या एसपीओ को मारते हुए नहीं देखा था पर उन्होंने मुझे उस दिन का पूरा घटनाक्रम समझाते
हुए यह बताया था कि क्यों वे यह समझते हैं कि इन लोगों को पुलिस ने ही मारा है और उन 9 लोगों के नाम भी बताए थे
जिनकी लाश वे पहचान सके थे

7 अप्रैल को जब मैं उनसे मिला था तब संतोषपुर, पोंजेर और भोगमगुडा गांव के ग्रामीण अपने गांव से भागकर
बीजापुर के अमानपारा में पेड के नीचे रह रहे थे

वहीं पर मेरी मुलाकात भोगमगुडा की आइति, उसके 3 बच्चे और उसकी सास से हुई थी, आइति ने मुझे बताया था कि एसपीओ उसके पति भोगल कमलू को घर से उठा कर ले गये थे फिर उन्होंने उसकी लाश देखी थी

वहीं मेरी मुलाकात संतोषपुर की बूढी कोडियम बीमे से भी हुई थी. लोगों ने मुझे बताया था कि बाकी मारे गये
लोगों का नक्सलियों से कोई लेना देना नहीं था पर बीमे का बेटा बोज्जा संघम सदस्य था और उसे पकडने के लिये ही
एसपीओ ने उस दिन संतोषपुर में सुबह सुबह शादी घर को घेरा था

बीमे ने मुझे बताया था "जो लोग मारने आए थे उसमें मेरा बडा बेटा सन्नू और संतोषपुर का सरपंच गंगा एमला भी
शामिल था". सन्नू और गंगा कुछ साल पहले एसपीओ बन गये थे

अप्रैल के आखिरी हफ्ते में रायपुर की एक संस्था एफएफडीए ने मेरे लेख को मानव अधिकार आयोग में भेजा. मानव
अधिकार आयोग ने लेख को पढकर एसपी बीजापुर को इस बारे में रिपोर्ट देने को कहा

इसके बाद डीजीपी श्री राठोड ने मई के पहले हफ्ते में विभागीय जांच के आदेश भी दिए

इस जांच के दौरान संतोषपुर में लाशों को निकाला गया और जांच के बाद पुलिस ने अब "अज्ञात वर्दीधारियों" के खिलाफ
एफआईआर दर्ज़ किया है

यहां पर हम आपके लिये संतोषपुर के उसी एसपीओ सरपंच गंगा एमला के साथ किया एक साक्षात्कार प्रस्तुत कर रहे
हैं जिस गंगा के बारे में मुझे मृतक बोज्जा की मां कोडियम बीमे ने सबसे पहले आरोप लगाया था

यह साक्षात्कार इंटरनेट पर पिछले कई दिनों से उपलब्ध है. हमें बताया गया है कि यह साक्षात्कार बीजापुर के
एसपी कार्यालय से 10 कदम की दूरी पर वहां लिया गया है जहां एसपीओ का निवास है.
सिर्फ इतना ही नहीं हमें यह भी बताया गया है कि इस साक्षात्कार की प्रति एसपी बीजापुर, प्रदेश के पुलिस
प्रमुख, प्रदेश के मुख्यमंत्री, और प्रदेश के राज्यपाल सहित तमाम गणमान्यों को आज से एक महीने पहले भेजी गई है

अब हम इस साक्षात्कार को आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं. यदि आप इसे रूबरू देखना चाह्ते हैं तो इंटरनेट पर
सर्च कर सकते हैं इसे अब हमने छत्तीसगढ की जन वेबसाइट www.cgnet.in पर भी अपलोड कर दिया है

प्रश्न : उस दिन कितने बजे तुम लोग यहां से गए थे, बताओ

उत्तर : यहां से ? साढे चार बजे, साढे चार बजे गए थे

प्रश्न : हां, क्या हुआ फिर ?

उत्तर : जाने से वहां पर संघम लोग थे, उनको पकडे. घेरे तो एक तो भाग गया

प्रश्न : फिर ?

उत्तर : एक भाग जाने के बाद, एक को पकड कर ले ला रहे थे हम लोग. ला रहे थे तो
बीच से पार्टी उधर से आ रहा था. पार्टी वापस ले गया हम लोगो को. बुला के वापस ले गया.

प्रश्न : दूसरी पार्टी, तुम्ही लोगों की या पुलिस की पार्टी थी ?

उत्तर : जी

प्रश्न : फिर क्या हुआ ?

उत्तर : उसके बाद ( एक और) दूसरी पार्टी आई, पुलिस पार्टी आई चेरपाल तरफ से. वो पार्टी के लिये हम वहां रूके. वो
लोग बीच में ले के आए उधर के लोग, जहां जहां मिले, संघम लोग, फिर गांव में लाके मार दिये

प्रश्न : काहे से मारे?

उत्तर : टंगिया से मारे

प्रश्न : कितने लोगों को मारे?

उत्तर : 6 लोग

प्रश्न : 6 लोग को मारे, तो ये मारने वाले कौन थे, पुलिस वाले थे ?

उत्तर : एसपीओ ( स्पेशल पुलिस अफसर) लोग थे

प्रश्न : एसपीओ लोग मारे तो तुम लोग मना नहीं किए कि मारो मत ?

उत्तर : हम लोग मना किए सर कि ऐसा मत करो, अपने गांव वाले हैं, उनको बचाना है बोलके. तो तुम कौन हो बचाने वाले
ऐसा बोले

प्रश्न : खाली एसपीओ एसपीओ थे ?

उत्तर : डीएफ ( डिस्ट्रिक्ट फोर्स) वाले भी थे

प्रश्न : और इन लोगों को लाके संतोषपुर में क्यों मारे ?

उत्तर : ये मालूम नहीं है सर. हम लोगों को जानकारी नहीं है सर वो दूसरा ही पार्टी है सर
प्रश्न : गांव वाले तो बोलते हैं कि कई लोग रात का महुआ बीनने वाले थे ?

उत्तर : जी सर ऐसे महुआ टोकरी लेकर आए थे, महुआ भी था. एकाध जन महुआ टोकरी लेकर आए थे

प्रश्न : उन लोगों को मार दिया ?

उत्तर : जी

प्रश्न : तो ये लोग संघम थे कि महुआ बीनने वाले थे?

उत्तर : एक दो महुआ बिनने वाले थे बाकी संघम थे

प्रश्न : बाकी संघम थे ?

उत्तर : (कोई उत्तर नहीं)

प्रश्न : तुम्हारा पूरा नाम क्या है?

उत्तर : गंगाराम एमला

प्रश्न : और संतोषपुर में पद क्या है?

उत्तर : संतोषपुर सरपंच

प्रश्न : सरपंच या पंच

उत्तर : सरपंच

Friday, May 18, 2007

फर्जी मुठभेड़ : कांग्रेस का उच्च स्तरीय जांच दल परसों आएगा

रायपुर । बस्तर में अब तक हुई फर्जी मुठभेड़ की जांच के लिए कांग्रेस का पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल 21 मई को रायपुर पहुंच रहा है। यह दल यहां से सड़क मार्ग द्वारा दंतेवाड़ा के लिए रवाना होगा। जांच दल विस्तृत रिपोर्ट हाईकमान को सौंपेगा।

जानकारी के अनुसार हाईकमान के निर्देश पर यह दल रायपुर आ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद अजीत जोगी ने इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से शिकायत की थी। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में आदिवासियों के फर्जी मुठभेड़ में मारे जाने की घटना से हाईकमान को विस्तार से जानकारी देते हुए मामले की जांच के लिए कांग्रेस का उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल बस्तर भेजने का आग्रह किया था। इसके अलावा समाचार पत्रों में लगातार फर्जी मुठभेड़ की खबर प्रकाशित हो रही है। आदिवासियों की हत्या फर्जी मुठभेड़ के नाम पर किए जाने के मामले को कांग्रेस हाईकमान ने काफी गंभीरता से लिया है। इसके बाद ही एक पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय दल भेजने का आदेश दिया है।

जानकारी के अनुसार इस दल में अभा कांग्रेस कमेटी की पूर्व सचिव सुशीला त्रिया, सांसद मधुसूदन मिस्त्री, शिवशंकर मीणा, मौरिश कुजूर व मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमती जमुना देवी शामिल हैं। जांच दल के चार सदस्य नई दिल्ली से नियमित विमान सेवा से रायपुर आएंगे। जमुना देवी रेल मार्ग से यहां पहुंचेगी। रायपुर आने के बाद यह टीम उसी दिन सड़क मार्ग से जगदलपुर के लिए रवाना होगी। 22 मई को सुबह यह टीम दंतेवाड़ा के लिए प्रस्थान करेगी। मुठभेड़ में मारे गए परिजनों व पुलिस अधिकारियों से भी यह दल मुलाकात कर दूसरे दिन राजधानी लौट आएगी। बताया जाता है कि यह दल फर्जी मुठभेड़ के अलावा शिविरों में रहने वाले आदिवासियों से भी मुलाकात करेगा। जांच दल इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट बनाकर कांग्रेस हाईकमान को सौंपेंगा।

(Source: Deshbandhu May 19, 2007)

Fake encounter: Chhattisgarh police under fire




Reetesh Kumar Sahu
Tuesday, May 15, 2007 (Raipur)
The exhumation of six bodies in Punjer village in Dantewada district has left the Chhattisgarh police ducking for cover.

An inquiry has been set up to investigate whether it was a fake encounter. ''We are probing the incident. If police officers are found guilty, they will not be spared,'' said Ankit Garg, Investigating Officer.

Villagers say a month ago, some policemen had picked up six people for a road project. Their bodies, which were later found in an adjoining village, had bullet wounds.

Afraid villagers buried the bodies without creating a fuss and fled the village but people from neighbouring villages got wind of the incident.

It was only after some newspapers reported the incident that the police got going and the bodies were dug out.

''Policemen took them, saying they wanted directions and killed them,'' said a villager.

Vague FIR

Despite the testimonies of villagers, the FIR filed says that though the attackers were ''unknown people'' in uniform, they could have been Naxalites since they often attack in the guise of police personnel.

Doctors who conducted the post mortem say the bullets were fired from close range, ruling out an encounter.

''Lot of encounters take place in the forests. Naxalites attack dressed in police clothing. Encounter incidents are probed at the magisterial level,'' said O P Rathore, DGP, Chhattisgarh.

With questions being asked about the police's role in fake encounters, senior police officials are making token gestures to reassure villagers.

Some policemen have been asked to undergo a test identification parade and the department is also thinking of transferring the case to another investigating agency.

(Source: NDTV , May 15 2007)

Tuesday, May 15, 2007

AN OPEN LETTER ON FAKE ENCOUNTER

AN OPEN LETTER TOTHE ACTING CHAIRPERSON OF
CHHATTISGARH STATE HUMAN RIGHTS COMMISSION


Shri L.Jayaditya Singh
Acting Chairperson
Chhattisgarh State Human Rights Commission
Near Mantralay, Raipur, Chhattisgarh

Dear Acting Chairperson
Adivasiyon ki rajy mein adivasiyon ki hatya ko le kar pichhle hafta se rajya mein bahas jari he. Is bahas mein aapka yogdan jaruri he. Kyonki rajyavasiyonki manavadhikar ki jima aap ke pas he.
At first I will thank you for your notice to Bijapur Superintendent of Police on extra-judicial killing of 12 tribal people of Panjer and Santoshpur village of Bijapur District of Chhattisgarh on April 28, 2007.

Meaning of notice to Bijapur Superintendent of Police
I understand that you respect article 11 of Universal Declaration of Human Rights which states, “Everyone charged with a penal offence has the right to be presumed innocent until proved guilty according to law in a public trial at which he has had all the guarantees necessary for his defence.” Thus, you asked him to enjoy all his rights for his defence because you also affirms that “Everyone is entitled in full equality to a fair and public hearing by an independent and impartial tribunal, in the determination of his rights and obligations and of any criminal charge against him’ as stated in Universal Declaration of Human Rights Article 10. Thank you-because you respect the rule of law and principles of human rights.

My petition on extra-judicial killing of 12 innocent tribal civilians
My petition was regarding the extra-judicial killing of 12 innocent tribal people who are killed by Chhattisgarh police alleging them supporters of Naxalites without providing necessary opportunities to secure their defence and fair public trail. Because they are tribals, Because they are living in villages, Because they are illiterate and Because they are poor and Because they have no voice, Chhattisgarh police killed them. This is not an isolated incident. There are extra-judicial killings in the state rising alarmingly. During 2005-2007, 508 tribal people have been killed.

Extra-judicial killing kya he
You must be aware that the most fundamental and thus, inviolable right to which every human being is entitled is the right to life. The violation of the right to life outside of legitimate judicial process is extrajudicial killing, which continues to go unchecked and unpunished because perpetrators investigate for the crime they commit. Media in Chhattisgarh report that the Bijapur police, who is the alleged perpetrator, is carrying the investigation.

You have power
You have the power for the purpose of conducting any investigation pertaining to the inquiry, utilise the services of any officer or investigation agency of the Central Government or any State Government with the concurrence of the Central Government or the State Government, as the case may be. 508 people killed by police action. But you have not asked to investigate by impartial agency or by your self. Further, NHRC guidelines states, “Whenever a specific complaint is made against the police alleging commission of a criminal act on their part, which makes out a cognisable case of culpable homicide, an FIR to this effect must be registered under appropriate sections of the I.P.C. Such case shall invariably be investigated by State CBCID”. But you asked the alleged perpetrator to investigate.

Please inform the people what are you doing
In this context, you have moral and legal obligation to inform the people of Chhattisgarh what are the circumstances make your eye closed. If it is not true, as a concerned citizen, I would like to ask you to probe the Bijapur incident by CBI or by your self. Further, it is also right of the people of Chhattisgarh to know how many extra-judicial cases you have considered and what happened to all cases. Did you deliver justice to marginalized?

Sincerely

Subash Mohapatra
A concerned citizen

(The letter writer is a human rights activist and associated with Forum for Fact-finding Documentation and Advocacy)

Friday, May 11, 2007

सात आदिवासियों को मुठभेड़ में मारने वाले को लेकर विवाद जारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सात निर्दोष आदिवासियों को मारे जाने की पुष्टि के बाद भी मामले को दबाने की कथित रूप से कोशिशें जारी हैं।
लगभग डेढ़ माह पुरानी इस वारदात की तीन दिन पूर्व आनन-फानन में जांच और दफनाये गये शवों को निकालकर पोस्टमार्टम करवाये जाने के बाद भी पुलिस ने अज्ञात लोगो के विरूद्ध मामला कल दर्ज कर लिया है लेकिन पुलिस के आला अधिकारी यह मानने को तैयार नहीं है कि यह हत्यायें पुलिस ने ही कथित रूप से नक्सलियों की सहयोगी मानते हुये की हैं।
बीजापुर जिलें के पोंजेर के लोगो का आरोप है कि पुलिस एवं विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) गत 30मार्च को उनके गंाव आये और सात लोगों को नक्सलियों का सहयोगी संघम सदस्य बताकर ले गये। इनके शव दूसरे दिन गंाव पहुंचे। घटना के सम्बन्ध में दर्ज प्राथमिकी में लगभग 30 लोगों को आरोपी बनाया गया है। मसलन हत्या करने वाले वर्दीधारी पुलिस या नक्सली दोनों हो सकते हैं।
पुलिस महानिदेशक ओ.पी.राठौर का दावा है कि इस प्रकरण में अभी तक की जांच से पुलिस की संलिप्तता नजर नहीं आती। जांच जारी है और जो भी दोषी होगा उसके विरूद्ध कार्रवाई होगी जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एवं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भाकपा ने पुलिस की जांच पर ही सवाल खड़ा किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी पहले ही बस्तर में हुई मुठभेड़ों की राज्य पुलिस की बजाय किसी निष्पक्ष एजेन्सी से जांच की मांग कर चुके हैं । कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग ने बस्तर में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ों की जांच के लिये दल भेजने का निर्णय लिया है।


[Source: jagran, Friday, May 11, 2007 1:59:59 AM (IST) ]

Thursday, May 10, 2007

12 tribals killed?

The Hitavada May 9, 2007

With the number of exhumed bodies in Santoshpur, in Bijapur district crossing the official figure of five on tues day, it is feared that more tribals were allegedly killed in Santoshpur on March 31.

In a petition filed with Chhattisgarh Human Rights Commission, it was allaged that a total of 12 persons were killed in the alleged fake encounter on March 31. The Complaint filed by Forum for Fact-finding Documentation and Advocacy named nine persons as killed in the encounter. On the nine, the authorities exhumed seven bodies out of eight on Monday and Tuesday.

The FFDA Had furnished names of nine persons namely Kodiya bojja, Emla Dula, Kudiam Musa, Madvi Mangu, Madkam Sanku, Modyam Lakhma, Modyam Fagu, Markam Soma, Bhogam Kamlu.

The FFDA stated that it could not identify three persons, killed alog with them. The petition was filed on April 28 after the matter came to fore through a section of media.

CGHRC Acting Chairman L.Jayaditya Singh said that a notice has been issued to Bijapur SP Ratanlal Dangi on April 28 and instructed him to submit a reply in 15 days time. It is learnt that Dangi is on leave and the charge has been given to Narendra Kumar Khare. " We are waiting for the reply of the Bijapur SP", said singh.

Eight exhumed bodies falsify cops' claim

May. 9th, 2007
by Our Correspondent
BIJAPUR, May 8 IN a major development in the Santoshpur fake encounter case, the authorities have exhumed two more bodies of tribals, taking the total number of bodies to eight against the police claim of five.

The body parts, soil and clothes of the buried have been sent to Raipur for forensic examination. According to sources, two bodies of Kodium Bujja (23) son of Kudium Billa of Santoshpur and Bhogam Pandu Kamlu of Bhogamguda were exhumed on Tuesday morning. Accordingly, the post-mortem of all the eight bodies was done in two days.

However, the police remained tight-lipped about the post-mortem report. Sources here said that bullets and injury marks inflicted by sharp-edged weapons were found on all the eight bodies.

Of the two bodies exhumed on Tuesday, Kamlu was killed in December last year. It was suspected that five tribals were killed in the alleged fake encounter at in Santoshpur on March 31.

Sources claimed that of the eight bodies exhumed, seven were reportedly buried 45 days ago. The exhumed bodies were of Kodiya Bojja of Santoshpur, Kudiam Moosa, Madvi Mangu, Madkam Sanku, Modyam Lakhma, Modyam Fagu, Bhogam Kamlu and Markam Soma.

The exhumation and post-mortem of the bodies were performed in the presence of Bhopalpatnam Nayab Tehsildar, Dantewada DMO Dr. Gangesh, ASP (Bijapur) Ankit Garg and Bijapur SHO Umesh Mishra. Meanwhile, none of the family members of tribal deserting Santoshpur and Ponjer returned to their houses in the respective villages. They reportedly took shelter in Bijapur, Gangalur and Cherpal relief camps.

(source: The Hitavada May 9)

Bank makes girl repay father's debt

Police killed civilians

Rathore orders probe

Chhattisgarh DGP warns police

DGP asks to probe fake encounter of tribals

Rape and torture of indigenous women by Indian security force

IG Police asked to appear in High Court

Dalit Girl's Rape and Murder

Chhattisgarh orders probe into killings of tribals

The Chhattisgarh government Sunday ordered a probe into the March killings of seven tribals by police in a Maoist stronghold, succumbing to mounting pressure from the media and social groups.

In what is being called a fake encounter, a group of Chhattisgarh policemen in league with Special Police Officers (SPOs), who are drawn from local youths, swooped in on the Ponjer village in Bijapur district March 31.

They took seven tribal youths to the neighbouring Santoshpur village for 'interrogation' and then killed them one by one branding them Maoist sympathisers.

State's police chief O.P. Rathor has ordered a probe into the killings.

He has asked Bijapur district police chief Ratanlal to urgently send a responsible police officer to Ponjer village and report on the allegations of a fake encounter, an official press statement said Sunday.

He has also asked Ratanlal to register murder charges against the policemen concerned if they are found to have killed civilians as Maoist sympathisers.

'Rathor has instructed Bastar Range Inspector General R.K. Vij to ensure proper legal action against guilty cops and brief the government on what action he has taken,' the release added.

Media reports said policemen pumped bullets into the bodies of four civilians while three others were axed to death.

Several youths of the Ponjer and Santoshpur villages are reported to be missing after the killings while dozens of families have deserted the villages fearing more such action.

Santoshpur village is located just eight km from small Bijapur town, the district headquarters of Biajpur district. Bijapur along with the neighbouring Dantewada district are part of the Maoist zone. The radicals had butchered 55 cops March 15 in Bijapur's Rani Bodli village in one of their deadliest attacks.

The government's probe order comes after the Chhattisgarh State Human Rights Commission took up the issue in late April and sought a detailed report from the Bijapur district police chief.

(Source: IANS May 06, 2007)

Chhattisgarh autopsy confirms foul play: shot wounds, gashes

Nitin Mahajan

Posted online: Thursday, May 10, 2007 at 0000 hrs IST

Raipur, May 9

Confirming foul play in the deaths of seven villagers killed in a fake encounter near Santoshpur village on March 31, the preliminary autopsy report of four of the victims’ bodies, exhumed for post-mortem from Ponjer village on Monday evening, has revealed gunshot wounds and deep gashes caused by sharp-edged weapons like axes or machetes. The bodies of two victims exhumed yesterday await post-mortem. One victim was cremated after the massacre.

The autopsy report was prepared by doctors from Dantewada District Hospital, R L Gangesh, B R Pujari and Sanjay Baghel. The autopsy was carried out after The Indian Express first reported the “encounter” which had been kept under wraps, in which villagers said seven innocent tribals were picked up by the police and Salwa Judum — an armed anti-Naxalite force comprising villagers — and killed in cold blood as “Naxalite sympathisers.”

Inspector General (Bastar Range) R K Vij. confirmed the findings but denied that any gunshot wounds had been found. “No bullets have been recovered from these bodies so far,” he said.

(Source: Indian Express, May 10, 2007)

Chhattisgarh wants to avoid Gujarat-like situation over 'fake encounter'

Chhattisgarh's Bharatiya Janata Party (BJP) government has said it would not arrest the police personnel who allegedly shot dead 5-7 tribals March 31 in Bijapur district, despite an official probe confirming that the villagers were branded as Maoists and killed.

'The government will not arrest the policemen involved in the killings of some civilians now as we do not want to create a Gujarat-like situation. Police personnel are fighting a battle in the interior Bastar region in extremely difficult situations,' Home Minister Ramvichar Netam told IANS Wednesday over telephone.

Netam's statement came after O.P. Rathore, the state's director general of police ordered a probe on May 5 into the alleged killings of innocent tribals by a police team in Bijapur's Santoshpur village.

The probe was ordered after locals alleged that at least 5-7 youth of Ponjer village were taken to Santoshpur by police for interrogation and some of them were shot while a few were axed to death.

'We exhumed some 4-5 bodies from a graveyard at Ponjer village Monday as part of the probe. An autopsy report confirms that three of them were hit by bullets at close range on the head and waist while others were axed to death,' a police officer monitoring the investigation told IANS.

'A police team had visited the Ponjer and Santoshpur villages on March 31, and on the basis of talks with the bereaved family members and information from the local police, it's certain that some police personnel crossed the limits and killed innocent villagers branding them as Maoists militants,' said the official.

He added that the 'probe has confirmed the involvement of policemen in civilian casualties on March 31 at Santoshpur. We don't like to toss up the issue, but it's a serious crime, Now the government has to decide whether the cops involved in killings should be arrested or not.'

The Chhattisgarh State Human Rights Commission has also sought a detailed report from the Bijapur district police chief about the civilian killings.

Bijapur and its neighbouring Dantewada districts are considered havens of Maoist guerrillas. The police estimate that about 4,000 hardcore militants armed with landmines and AK-47s operate mainly in the forested stretch.

Local media reports say that at least 250 tribals of Santoshpur village and about 350 tribals of Ponjer fled to unknown locations last week fearing the police would repeat the March 31 brutality.

(Source: IANS, May 9, 2007)

Tuesday, May 8, 2007

Bodies of four killed in fake encounter exhumed

BIJAPUR, May 7 THE bodies of four tribal youths killed in an alleged fake encounter at Ponjer some eight kms from here on March 31, were exhumed and performed the post-mortem in the presence of senior administrative and police officials on Monday afternoon.

One of the slain youth was cremated at a place near the spot where four were buried. It may be recalled that tribal people from Ponjer were picked up by the Chhattisgarh Armed Force and SPOs, taken to a nearby village Santoshpur and later killed them. Sub-Divisional Magistrate Sadaram Thakur had requisitioned four doctors with two from Dantewada (Dr Gangesh and Dr Baghel) and one each from Bhopalpatnam and Bijapur namely Dr Pujari and Dr Thakur respectively for the post-mortem. Bijapur SP in-charge Narendra Kumar Khare, ASP Ahire, ASP (Bijapur) Ankit Garg, Bijapur SHO and the family members of the deceased were present at the spot. Accordingly, the bodies of Modium Lakhma (40), Modium Phagu (50), Madkam Sanku and Kodium Moosa (50) were exhumed. That of Madvi Mangu (30) was cremated. When the bodies were taken out of the grave, the family members could not control their grief and broke into tears. The relatives of a deceased, one of them woman, explained to the mediapersons after reaching the spot in Gondi language what had happened on March 31. The woman, Modium Soni is the paternal aunt of Phagu, who was killed along with four others in the fake encounter. She claimed that five persons from Ponjer namely Phagu, Madvi Mangu, Kudium Moosa, Modium Lakhma and Madkam Sanku were collecting the Mahuwa at Ponjer. The police picked them away to Santoshpur. Apart from them, the police also allegedly killed some more members of their family namely Madvi Lakhmi, Modium Mangali, Modium Budhari, Markam Ata and Modium Gorra. The villagers informed, alleged Soni, that the police took them to the jungles of Santoshpur and killed them. Talking to mediapersons, some villagers said that they had the information of the alleged murders of the five persons but in scare, did not report it to the police. They brought the bodies to Ponjer and buried four of them while one was cremated. ?We fled Ponjer village and reached Bijapur fearing our lives,? they said. Meanwhile, the officials refused to comment on the post-mortem report and they only said that the investigation was under way. Earlier, the police had obtained the consent of the family members of all the victims for exhuming the bodies. It is mandatory to obtain the consent of the family members of the deceased and the permission is given by the District Magistrate. Two days back, IGP (Bastar) R K Vij talking to The Hitavada said that the police team investigating the fake encounter case were trying to contact the family members of all the five youths killed in Ponjer on March 31. He admitted that the police team found Ponjer and its adjoining Santoshpur village deserted after reached there. According to him, efforts were on to locate them as also the family members of the deceased. DGP Om Prakash Rathor had ordered a probe into the alleged fake encounter on May 4 following allegations and reports appearing in the print and electronic media. Later, an investigation team under the leadership of Garg was constituted.
(Source: The Hitavada May 8, 2007)

पीड़िता को पुलिस ने दी धमकी

मैनपाट । मैनपाट में एक तिब्बती शरणार्थी पर यहां की एक जनजातीय विवाहिता महिला द्वारा लगाये गये बलात्कार के आरोप के मामले में पुलिस की भूमिका काफी संदिग्ध हो गई है। महिला के अनुसार कुछ पुलिस वालों ने उसके घर पहुंचकर कहीं मुंह खोलने पर बुरे अंजाम की चेतावनी दी। मैनपाट थाना क्षेत्र के ग्राम परपटिया निवासी जनजातीय महिला ने कैम्प नंबर छह के तिब्बती शरणार्थी केलसगा पर बलात्कार का आरोप लगाया है। इस मामले में मैनपाट पुलिस द्वारा अभी तक कोई कार्रवाई न होने पर महिला ने ले-देकर मामले को रफा-दफा करने का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने कार्रवाई तो दूर अभी तक घटना की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की है। महिला ने बताया कि कुछ पुलिस कर्मी आज उसके घर पहुंचे और यह कहकर धमकाने का प्रयास किया कि वह भूल जाएं कि उसके साथ कुछ हुआ है वरना अंजाम बुरा होगा। महिला आज न्याय के लिए पुलिस के उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाने जा रही है।
उसने बताया कि वह अम्बिकापुर जाकर पुलिस के उच्चाधिकारियों से मिलेगी। लेकिन साथ ही यह भी कहा कि वह भयभीत है कि जिस तरह से पुलिस वाले उसे धमकाने का प्रयास कर रहे हैं उसे आशंका है कि उसके साथ पुलिस कुछ भी करा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि घटना को एक सप्ताह से ऊपर होने जा रहा है लेकिन एक प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हुई है। महिला ने पूरे मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब कोई घटना ही नहीं हुई थी तो पुलिस वाले तीन दिनों तक उस आरोपी को थाने में क्यों बैठाए रखा। तिब्बती प्रमुख तथा स्थानीय नेताओं की उपस्थिति में उससे सादे कागज पर अंगूठा क्यों लगवाया गया। इस महिला के अनुसार उसके साथ आरोपी ने तब बलात्कार किया जब वह बाजार से घर लौटने में रात हो जाने के कारण एक परिचित महिला के साथ रूक गई थी। तिब्बती ने रात में उसका मुंह दबाकर उसके साथ बलात्कार किया था।
(Source: Deshbandhu May 8. 2007)

पोंजेर में मारे गए थे कुछ लोग

भास्कर न्यूज
06 May 2007

बीजापुर
पहले कथित फर्जी मुठभेड़ में
पांच आदिवासियों की मौत होने की
जांच शुरू हो गई
है। एडीशनल एसपी अंकित कुमार
गर्ग ने रविवार को घटना में
मारे गए पोंजेर गांव
के चार लोगों के परिजनों के
बयान लिए। पता चला है कि मृतकों
की मृत्यु के सही
कारणों का पता लगाने दफनाई गई
लाशों को निकालकर पोस्टमार्टम
कराया जाएगा। जांच
दो दिन में पूरी हो जाएगी।

बीजापुर-गंगालूर मार्ग पर
स्थित जिले के ग्राम पोंजेर में
रहने वाले मड़ियम फागू,
मड़ियम लखमा, कुड़ियम मूसा, मड़कम
सन्नू, पोड़िया और माडवी मंगू को
गत 31 मार्च को
कथित रूप से पुलिस गांव से उठा
ले गई थी। बाद में पोड़िया को
छोड़कर बाकी पांच
लोगों की लाशें मिलीं। पोड़िया
का अब तक पता नहीं चला है।
भास्कर द्वारा मामले
के खुलासे के बाद शनिवार को
पुलिस महानिदेशक ओपी राठौर ने
जांच के आदेश दिए थे।

एडीएसपी श्री गर्ग ने आज
बीजापुर के नयापारा शिविर में
रहने वाले मृतकों के
परिजनों को बुलवाया। थाना
परिसर में अलग-अलग सभी लोगों से
पूछताछ की गई। भाषा
की समस्या को देखते हुए बयान के
दौरान गोंडी जानने वाले गांव के
एक व्यक्ति को
दुभाषिया बनाया गया। श्री गर्ग
ने ग्रामीणों को निडर होकर
सच्चाई बताने की सलाह
दी। सोमवार को वे संतोषपुर जाकर
प्रभावितों से बातचीत करेंगे।
पोंजेर संतोषपुर
ग्राम पंचायत का ही आश्रित गांव
है। घटना के बाद से गांव के
स्कूलपारा के सभी
22 घर खाली पड़े हैं, आज दोपहर को भी
गांव में सन्नाटा था।

जांच अधिकारी श्री गर्ग के
मुताबिक 31 मार्च को कुछ लोगों की
मौत हुई, यह साफ
हो गया है। मृतकों की संख्या के
बारे में स्थिति जांच के बाद
साफ होगी।

उन्होंने कहा कि दीगर घटनाओं
में मारे गए लोगों को भी इसमें
शामिल किया जा रहा
है। बयान में परिजनों ने मृतकों
के शरीर पर बंदूक की गोली और
धारदार हथियारों
के निशान देखने की पुष्टि की
है। जांच अधिकारी को शाम तक चली
पूछताछ में एक भी
ऐसा व्यक्ति नहीं मिला है,
जिसके सामने इन पांचों की हत्या
की गई।

इधर कथित रूप से पुलिस द्वारा
की गई हत्या की जांच का काम
पुलिस अफसर को दिए
जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसी
तरह बयान के लिए पीड़ित लोगों को
थाने में
बुलाए जाने के फैसले पर भी लोग
हैरान हैं। पुलिस के डर से जंगल
में भाग जाने
वाले आदिवासी थाने में अनजान
बंदूकधारी जवानों के बीच
सच्चाई बता पाएंगे, इस पर
जानकारों को शक है।

हत्याकांड में बच गए पोड़िया की
पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही
है। हालांकि घटना
के बाद से इस व्यक्ति का अब तक
पता नहीं है। उसकी लाश भी नहीं
मिली है। आशंका
यह भी है कि कहीं पोड़िया की भी
हत्या न हो गई हो।

Jogi demands independent probe

Former Chhattisgarh Chief Minister Ajit Jogi has demanded an independent probe by a sitting High Court judge or the CBI into the March 31 "encounter" in which seven tribals were allegedly killed by security personnel in Bijapur.
Speaking to The Indian Express, Jogi said there has been a spurt in such encounters since the launch of Salwa Judum, an anti-Naxalite movement in south Bastar in June, 2005. "There is an urgent need to establish through an independent inquiry whether any Chhattisgarh policemen or Salwa Judum activists were involved in the massacre as has been alleged by tribals in Ponjer village," the former Chief Minister added.

He said though a departmental inquiry has been constituted by the Chhattisgarh Police, it isn't expected to be of much help as an impartial approach in the conduct of any police officer could not be expected.

"The government should immediately order a magisterial or judicial inquiry into the incident. When the extra-judicial killing of one person in Gujarat can lead to the arrest of three IPS officers, why is the Raman Singh government not reacting to seven deaths?" he asked.

The former Chief Minister stated that he will also request Congress chief Sonia Gandhi to send a fact-finding team to the area.

On March 31, seven tribals were allegedly killed in an "encounter" in Santoshpur village near Bijapur in Chhattisgarh. Residents of Ponjer village said the tribals, who the police claimed were Sangham members (Naxalite sympathisers), were picked up by members of the Chhattisgarh Armed Police and Salwa Judum, taken to nearby Santoshpur, and killed. They alleged that at least four of them were hacked to death and the rest shot.

After The Indian Express reported about the alleged fake encounter, Director General of Police O P Rathore instituted a departmental inquiry under Inspector General (Bastar Range) R K Vij.

(source: indian express may 8, 2007)

Chhattisgarh orders probe into killings of tribals

Raipur, May 6 (IANS) The Chhattisgarh government Sunday ordered a probe into the March killings of seven tribals by police in a Maoist stronghold, succumbing to mounting pressure from the media and social groups.

In what is being called a fake encounter, a group of Chhattisgarh policemen in league with Special Police Officers (SPOs), who are drawn from local youths, swooped in on the Ponjer village in Bijapur district March 31.


They took seven tribal youths to the neighbouring Santoshpur village for 'interrogation' and then killed them one by one branding them Maoist sympathisers.


State's police chief O.P. Rathor has ordered a probe into the killings.


He has asked Bijapur district police chief Ratanlal to urgently send a responsible police officer to Ponjer village and report on the allegations of a fake encounter, an official press statement said Sunday.


He has also asked Ratanlal to register murder charges against the policemen concerned if they are found to have killed civilians as Maoist sympathisers.


'Rathor has instructed Bastar Range Inspector General R.K. Vij to ensure proper legal action against guilty cops and brief the government on what action he has taken,' the release added.


Media reports said policemen pumped bullets into the bodies of four civilians while three others were axed to death.


Several youths of the Ponjer and Santoshpur villages are reported to be missing after the killings while dozens of families have deserted the villages fearing more such action.


Santoshpur village is located just eight km from small Bijapur town, the district headquarters of Biajpur district. Bijapur along with the neighbouring Dantewada district are part of the Maoist zone. The radicals had butchered 55 cops March 15 in Bijapur's Rani Bodli village in one of their deadliest attacks.


The government's probe order comes after the Chhattisgarh State Human Rights Commission took up the issue in late April and sought a detailed report from the Bijapur district police chief.

(source: IANS May 7, 2007)

Probe reveals Chhattisgarh Police killed civilians

RAIPUR: The Chattisgarh Police have admitted that some of their men, busy fighting Maoist guerrillas, killed civilians in cold blood in a village in March.

But the police brass says that murder charges will be registered against the guilty men only after the bodies were exhumed and autopsies done "within a day or two", said a police official.

"An initial probe – based on talks with tribals of Ponjer village and police personnel's statements – confirm that a police team visited the village March 31 and caused some civilian casualties," said the police official.

"The police headquarters and the home department have been informed about the initial probe findings and civilian loss of lives. But murder charges will be registered against cops only after autopsies," he added.

"Police will conduct a fair probe and will not spare anyone who killed innocent villagers in the name of anti-Maoist measures. The guilty have to pay the price, but only after a full probe report is obtained," he said.

Chhattisgarh Director General of Police O P Rathore ordered a probe Sunday into the alleged killings of five to seven civilians by a group of policemen in the tribal village of Ponjer in the state's southern tip, a Maoist stronghold.

The police allegedly took seven tribal youths to the neighbouring Santoshpur village for "interrogation", branded them Maoist sympathisers and killed them.

Local media reports claim that the cops shot dead four tribals and axed to death the three others

(source: the times of india, 7 may 2007)

Monday, May 7, 2007

पांच लोगों की कथित हत्या की जांच के आदेश

रायपुर। बीजापुर जिले में पांच लोगों की कथित मुठभेड़ में मारे जाने या हत्या की खबर के बाद पुलिस महानिदेशक ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पुलिस महानिदेशक ओ पी राठौर ने एक समाचार पत्र में बीजापुर के पोंजेर गांव में पांच लोगों की कथित मुठभेड़ में मारे जाने या हत्याएं संबंधी रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि राठौर ने बीजापुर के पुलिस अधीक्षक रतनलाल को तत्काल मौके पर किसी जवाबदार पुलिस अधिकारी को भेजकर घटना के बारे में पता लगाने का निर्देश दिया है। पुलिस महानिदेशक ने कहा है कि यदि ग्रामीणों की हत्या हुई है तो हत्या का प्रकरण दर्ज कर तत्काल जांच की जाये।

गौरतलब है कि चार मई को प्रकाशित रिपोर्ट में बीजापुर के पोंजेर गांव में पांच लोगों की कथित एनकाउंटर या हत्याएं के संबंध में खबर प्रकाशित की गई थी। इस खबर के मुताबिक पोंजेर गांव के आदिवासियों ने बताया कि करीब एक माह पहले तलाशी अभियान पर निकले पुलिस बल और विशेष पुलिस अधिकारियों की टीम पोंजेर गांव पहुंची और छह लोगों को पेड़ के नीचे इकट्ठा किया और नक्सलियों का साथ देने का आरोप लगाया। इसके बाद पुलिस सबको अपने साथ दूसरे गांव ले गई। बाद में वहां से पांच लोगों की हत्या की खबर आई जबकि एक ग्रामीण लापता है। खबर के मुताबिक घटना के बाद से गांव खाली है तथा गांव वाले अब बीाजपुर के राहत शिविर में रहते हैं।


[Dainik Jagran, Monday, May 07, 2007 2:12:07 AM (IST) ]

Saturday, May 5, 2007

Rathor orders probe into death of 5 tribals in alleged fake encounter

May. 6th, 2007
by Staff Reporter
RAIPUR, May 5 IN A MAJOR development, DGP O P Rathor has on Friday ordered a probe in the alleged fake encounter in which five tribals were killed at Ponjer village in Bijapur district in March and asked to exhume their bodies for post-mortem.

The DGP order comes close on the heels of the Chhattisgarh Human Rights Commission notice to Bijapur Superintendent of Police seeking explanation on the alleged fake encounter killings of five villagers at Ponjer in March this year. Talking to The Hitavada, IGP (Bastar Range) R K Vij said that a police team has been sent to the village to investigate the matter and they will talk to the family members of the victims. Meanwhile, sources said that the bodies of the five youths would be exhumed on Sunday for post-mortem in the presence of Executive Magistrate after completing the legal formalities. Vij said that a formal order is yet to be received but the investigation was started after the verbal order from the DGP adding that legal action would be taken against those involved if the charges against them was proved. Rathor ordered the enquiry based upon the newspaper reports regarding the alleged fake encounter killings of five youths after taking them to Santoshpur from Ponjer village in Bijapur district in March last. Kudiyam Vijja and Kudiyam Mora, the two former Maoists had joined as Special Police Officer (SPO) after their surrender. It was alleged that they again joined Naxal movement. Santoshpur village is situated eight kilometres from Bijapur police station. It has around 85 houses having population of around 540. As per the incident, on March 3, 2007, at the village, a marriage was scheduled between Paspul Chandu and a girl from Kotapal. Vijja and Mora had arrived to participate in the marriage ceremony. An informer intimated Salwa Judum activists and police about their arrival at the marriage party. The Salwa Judum activists and district police force arrived at the spot at around 5.00 pm and rounded up the complete house, where the ceremony was going on. Firing started in which Vijja was killed whereas Mora received bullet injury on leg but escaped. After the incident, another police party set out in search of Naxalites and reached village Ponjer, situated near Santoshpur.

(Source: The Hitvada, May 6 2007)

Massacre out in the open, DGP of Chhattisgarh takes back words, orders a probe

Nitin Mahajan

Posted online: Sunday, May 06, 2007 at 0000 hrs IST

Raipur, May 5

A day after this newspaper reported that the killing of seven tribals in an “encounter” on March 31 near Bijapur in Chhattisgarh was kept under wraps, the state’s top police officer today announced a probe saying the bodies will be exhumed for autopsy. A police team is also on its way.

Local police have been asked to register a case of murder “against unknown persons”, said Director General of Police O P Rathore. “The bodies will be exhumed and if evidence is found they were killed by security personnel, legal action will follow,” said Rathore. This is in sharp contrast to what he told The Indian Express just days ago: “Gujarat ki bimaari sab jagah phaila rahein hai log. The Naxalites are savages, we are not into these things.”

This newspaper had reported yesterday that according to villagers, seven tribals from Ponjer village, who the police claim were Sangham members (Naxalite sympathisers), were picked up by Chhattisgarh Armed Police and Salwa Judum, taken to nearby Santoshpur, and killed.

“These were Sangham members and we had gone to these villages to conduct a search mission. There was an encounter and we were forced to act,” a senior district police officer had said.

Father's debt repaid from girl's scholarship

Why this Chhattisgarh ‘encounter’ that killed seven a month ago is still a secret

Nitin Mahajan

Posted online: Saturday, May 05, 2007 at 0000 hrs IST

Bijapur, May 4

On March 31, seven tribals were allegedly killed in an ‘encounter’ in Santoshpur village near Bijapur in Chhattisgarh.

There was no FIR, the killings were not publicised or reported, not even in the local media.

Residents of Ponjer village say the tribals, who the police claim were Sangham members (Naxalite sympathizers), were picked up by members of the Chattisgarh Armed Police and Salwa Judum, taken to nearby Santoshpur, and killed.

They say at least four of them were hacked to death and the rest shot.
The five Ponjer villagers who were killed: Madiyam Fagu, Madiyam Lakhma, Kudiyan Musa, Markam Sanko and Marvi Mangu.

Two others, Kudiuyam Bojha, a former SPO from Santoshpur who had apparently fallen out with the local administration, and an unidentified person were killed.Two people, Kodia Mura and Podia, have been missing since the incident and villagers fear they have also been killed.

“These were Sangham members and we had gone to these villages to conduct a search mission. There was an encounter and we were forced to act,” says SP Bijapur, Ratan Lal Dangi.

He, however, is unable to explain why the victims were not carrying any weapons.
Home Minister Ram Vichar Netam says he does not know of any such encounter. “I have been out of the city for quite some time and would only be able to provide you with relevant details later,” he says.

Director General of Police O P Rathore, however, admits there was an encounter. “Gujarat ki bimari sab jagah faila rahe hain log. Chhattisgarh Police has a reputation for maintaining human rights. The Naxalites are savages and use such techniques, we are not into such things,” Rathore says. He says that Naxalite sympathizers attacked the search party and they were killed in retaliatory firing.
But the villagers say that on March 31, a group of security personnel marched into Ponjer at about 8.30 a.m. They started abusing people, alleging that they were Naxal sympathisers. “They asked all of us to gather under a tree and later asked these six people to accompany them for questioning,” said Madiyam Soni, whose son was killed.
The security personnel and members of Salwa Judum, the anti-Naxal force supported by the government, were allegedly accompanied by the local sarpanch Minku Gangaram. Villagers say Gangaram was upset with them as they had demanded developmental work in the village.

“The security personnel took these six people to Santoshpur village, where four others were also brought. They started beating these people. When one of them tried to escape, they shot Kudiyam Mura,” says a Santoshpur villager.

Villagers from the forest near Santoshpur recovered the bodies around 5 p.m.
“How can someone act in such a cruel manner? These security personnel used axes and machetes to hack the victims,” said Kudiyan Puria, a resident of Santoshpur village.
Soni said the villagers had no contact with anyone remotely concerned with Naxalites. “These men were picked up while they were collecting mahua. Do Naxalites or their sympathisers need to do such things?” she says.

Ponjer, which is home to over 25 families, is now deserted as residents have fled to neighbouring villages. Soni and her son, twelve-year-old Madiyam Mani Ram, are the only people left. Despite threats by Salwa Judum members, the family has decided to stay back. “I want the killers of my brother to be punished,” Mani Ram says, pointing to the grave of his brother, who was buried along with three other victims of the massacre.

The villagers are so scared that they haven’t even registered a complaint at the police station in Bijapur, 10 km away. “How can we hope to even approach the police when some of their own have committed such an act,” says Poonam Ramlu, a Ponjer resident.

Thursday, May 3, 2007

Bank makes girl repay father’s debt

Ejaz Kaiser
Raipur, May 04, 2007

A co-operative bank recovered a loan from the scholarship of a poor Dalit girl student as her father had failed to repay the amount.

A poverty-ridden farm labourer Iswar Dash of village Dudhiya in Durg district took a loan from a local co-operative bank in 2003 under ‘Income Generation Programme’ — a scheme launched for the benefit of the scheduled castes — but could not repay it on time. His daughter Sahodra, a Class VIII student, is a recipient of a Chhattisgarh government scholarship.

The scholarship money — Rs 1,150 annually — was expected to be disbursed to Sahodra by the bank from where her father took the loan. But she has not received a single penny of her scholarship so far as the bank has been adjusting the amount against her father’s loan since 2005.

The Durg collector Subrata Sahu told the Hindustan Times that an inquiry had been ordered after the issue was brought to his notice. “This practice is unlawful. The bank has no right to claim the loan amount in such a manner,” he said. He had an unconfirmed report that the manager of the bank had been suspended by the management.

The Chhattisgarh Human Rights Commission (CGHRC), on a complaint filed by the Forum for Fact-Finding Documentation and Advocacy (FFDA), has issued notice to Durg district administration to report on the issue. The commission has also sought explanation from the bank. The FFDA director Subash Mohapatra said that the girl’s father approached his organisation when the bank refused to release the scholarship.

The FFDA claimed that the incident was not an isolated case as more students were losing their scholarship money to banks to repay loans taken by their parents. Terming the loan recovery approach of the bank as wrong and discriminatory, Mohapatra said, “What right does the bank have to siphon off the scholarship money given specifically for educational purposes?”
(Source: Hindustan Times)

दलित छात्रा की स्कालरशिप डकारता रहा सहकारी बैंक

रायपुर। सरकारी स्कूल की 13 वर्षीय दलित छात्रा को महज इसलिए अपनी शैक्षणिक छात्रवृत्ति से महरूम होना पड़ा क्योंकि एक सहकारी बैंक ने उसके पिता द्वारा लिए गए ऋण की वसूली का जरिया उसकी छात्रवृत्ति को बना लिया। दुर्ग जिले में बालोद विकासखंड के एक सरकारी हाईस्कूल में कक्षा आठ की छात्रा सहोदरा को राज्य सरकार की ओर से 1100 रुपए वार्षिक की छात्रवृत्ति मिलती है। सरकार की ओर से छात्रवृत्ति की राशि दुर्ग राजनांदगांव क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को भेज दी जाती है जिससे वह राशि छात्रा तक पहुंच सके। विडंबना यह है कि छात्रा को यह राशि इसलिए नहीं मिल रही है क्योंकि बैंक ने अवैध तरीके से इस राशि को अपनी वसूली का जरिया बना लिया है। यह मामला तब उजागर हुआ जब स्कूल के शिक्षकों ने बैंक की दूधिया शाखा से संपर्क किया। शिक्षकों की इस शिकायत के बावजूद कि सहोदरा को छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है, बैंक ने उक्त राशि जारी करने से इंकार कर दिया। इस घटनाक्रम की जानकारी लगने पर एक स्वैच्छिक संगठन 'फोरम फार फैक्ट फाइडिंग डाक्यूमेंटेशन एंड एडवोकेसी' ने राज्य मानवाधिकार आयोग की शरण ली और आयोग ने इस मामले में दुर्ग कलेक्टर, बैंक प्रबंधक और सरकारी हाईस्कूल दूधिया के प्रधानाचार्य को नोटिस जारी किए। एफएफडीए ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि दूधिया गांव के निवासी ईश्वर दास ने उक्त बैंक से अनुसूचित जाति वर्ग के उन्नयन संबंधी एक योजना के तहत 12 हजार रुपए का ऋण लिया था, लेकिन वह किश्तों का भुगतान नहीं कर पाया। उधर बैंक की जानकारी में यह बात आने पर कि उसके माध्यम से जिस छात्रा को छात्रवृत्ति मिलती है वह ईश्वर दास की पुत्री है, बैंक ने छात्रवृत्ति के जरिए ही ऋण वसूली शुरू कर दी। एफएफडीए के निदेशक सुभाष महोपात्रा का कहना है कि छात्रवृत्ति न मिलने से छात्रा के लिए आगे पढ़ाई जारी रखना बेहद कठिन हो गया। मामला राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने पर बैंक ने दूधिया शाखा के प्रबंधक राकेश तिवारी को निलंबित करते हुए उसके खिलाफ जांच के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में दुर्ग कलेक्टर सुब्रत साहू भी मानते हैं कि नाबालिगों से बैंक ऋण वसूली का कोई प्रावधान नहीं है और इस मामले में बैंक की कार्रवाई असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि यहां तक कि वयस्कों से भी ऋण वसूली के मामले में कुछ तयशुदा शतरें का पालन जरूरी है। कलेक्टर ने कहा कि इस प्रकरण की जांच करायी जा रही है। [Dainik Jagran, Thursday, May 03, 2007 2:15:52 AM (IST) ]

Wednesday, May 2, 2007

'हत्याओं' पर बस्तर पुलिस को नोटिस




'हत्याओं' पर बस्तर पुलिस को नोटिस

विनोद वर्माबीबीसी संवाददाता, दिल्ली


आयति का कहना है कि उनके पति को विशेष पुलिस अधिकारी पकड़कर ले गए थे
बस्तर में पुलिस द्वारा 12 आदिवासियों को मार दिए जाने की ख़बरों के बीच छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग ने पुलिस को नोटिस देकर स्पष्टीकरण माँगा है.
छत्तीसगढ़ के एक स्वयंसेवी संगठन की शिकायत पर आयोग ने यह नोटिस जारी किया है.
बस्तर के बीजापुर से सात किलोमीटर दूर स्थित गाँव संतोषपुर और पास के दो गाँवों के लोगों का आरोप है कि पुलिस ने नक्सली मुठभेड़ के नाम पर 31 मार्च को 12 ग्रामीणों की हत्या कर दी.
पुलिस का कहना है कि छत्तीसगढ मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद मामले की जाँच की जा रही है.
बस्तर में पुलिस के हाथों ग्रामीणों के मारे जाने की ख़बर ऐसे समय में सामने आ रही है जब देश भर में गुजरात पुलिस के फ़र्ज़ी मुठभेड़ की ख़बरों पर बवाल मचा हुआ है.
गुजरात पुलिस के आलाअफ़सरों पर आरोप है कि उन्होंनें फ़र्ज़ी मुठभेड़ में एक युवक और उसकी पत्नी को मार डाला. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है.
शिकायत
यह मामला पहली बार आठ अप्रैल एक टेलीविज़न चैनल की ख़बर में सामने आया था जिसमें कुछ ग्रामीणों का बयान प्रसारित किया गया था.
बाद में रायपुर के दो अख़बारों में इस घटना का ज़िक्र किया गया था.
मानवाधिकार पर कार्य करने वाली एक संस्था 'फोरम फॉर फैक्ट फाइंडिंग, डॉक्युमेंटेशन एंड एडवोकेसी' (एफ़एफ़डीए) ने इन्हीं ख़बरों के आधार पर छत्तीसगढ़ मानवाधिकार आयोग का दरवाज़ा खटखटाया था.
इस संस्था के संचालक सुभाष महापात्र ने बीबीसी को बताया कि मीडिया रिपोर्ट मिलने के बाद वे ख़ुद संतोषपुर गए थे और वहाँ ग्रामीणों से बात की थी.
उनका कहना है, "गाँव वाले तो यह विस्तार से बता रहे हैं कि किस तरह पुलिस गाँव वालों को पकड़कर ले गई और अगले दिन सुबह उनकी लाश मिली."
वे कहते हैं, "लेकिन वे किसी भी तरह से इसे लिखकर देने को तैयार नहीं हैं."
बीजापुर और दंतेवाड़ा में आदिवासियों के बीच यूनीसेफ़ के साथ मिलकर काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने इस मामले की शिकायत करते हुए राष्ट्रपति, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सहित बहुत से लोगों को पत्र भेजा है.


जाँच बीजापुर पुलिस ज़िले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एमआर आहिरे ने बीबीसी से हुई बातचीत में माना कि राज्य मानवाधिकार आयोग ने नोटिस भेजा है.


हमें मीडिया से पता चला कि वहाँ ग्रामीण मारे गए हैं. हालांकि हमारे पास आकर किसी ग्रामीण ने शिकायत नहीं की है

एमआर आहिरे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
घटना के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा, "31 मार्च को संतोषपुर एक पार्टी गई थी और वहाँ नक्सलियों के साथ एक एनकाउंटर हुआ था."
उन्होंने कहा, "चूंकि रात हो गई थी इसलिए पुलिस एनकाउंटर के बाद सर्च नहीं कर पाई थी और वापस लौट आई थी. उस समय पुलिस को कोई लाश नहीं मिली थी. थाने में अपराध दर्ज कर लिया गया था."
आहिरे बताते हैं, "हमें मीडिया से पता चला कि वहाँ ग्रामीण मारे गए हैं. हालांकि हमारे पास आकर किसी ग्रामीण ने शिकायत नहीं की है."
उन्होंने कहा कि मानवाधिकार आयोग के नोटिस के बाद एक पुलिस अधिकारी से कहा गया है कि वे इस मामले की जाँच करें. उनका कहना है कि इस जाँच के बाद ही घटना का पूरा विवरण देना संभव होगा.
घटना
बीबीसी ने टेलीविज़न चैलन ईटीवी के पत्रकार नरेश मिश्रा और बस्तर जाकर ग्रामीणों से बात कर चुके स्वतंत्र पत्रकार शुभ्रांशु चौधरी से घटना के विवरण के बार में बात की.
ग्रामीणों ने बताया कि 31 मार्च को संतोषपुर में एक शादी हो रही थी और वहाँ पास के दो गाँवों पोंजेर और भोगमगुड़ा से लोग आए हुए थे.
ग्रामीणों का कहना है कि राज्य पुलिस के कुछ जवान, राज्य सरकार द्वारा नियुक्त विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) और केंद्रीय अर्धसैनिक बल के कुछ जवान शाम को वहाँ पहुँचे और कुछ लोगों को पकड़कर ले गए.
कोडियम बीमा ने अपन छोटा बेटा खो दिया. जबकि उसका बड़ा बेटा एसपीओ है और उस दिन पुलिस दल के साथ ही था.
ग्रामीणों के अनुसार सुबह उन लोगों ने अलग-अलग जगह बारह लोगों की लाशें मिली.
इस घटना में अपने पति को खो चुकी भोगमगुड़ा की आयति ने बताया “मेरे पति भोगल कमलू को एसपीओ घर से पकड़कर ले गए फिर संतोषपुर में हमने उसकी लाश देखी. उसे टंगिये और कुल्हाड़ी से मार डाला था.”
ग्रामीणों का कहना है कि 31 मार्च की रात पुलिस ने कई घरों को भी जला दिया था.
ग्रामीण मानते हैं कि उनमें से एक, कोडियम बोज्जा ज़रुर नक्सलियों से जुड़ा हुआ था लेकिन बाक़ी समान्य ग्रामीण थे.
इन सभी लोगों पर दबाव था कि वे गाँव छोड़कर सल्वाजुड़ुम के कैंपों में जाकर रहें.
सल्वा जुड़ुम उस आंदोलन का नाम है जिसे राज्य सरकार जनआंदोलन कहती है और इसे चलाए रखने के लिए धन-बल से सहयोग कर रही है.
इस आंदोलन के चलते बस्तर के हज़ारों ग्रामीणों को गाँवों से विस्थापित करके सड़क के किनारे अस्थाई कैंपों में रखा गया है.
कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि सल्वा जुड़ुम के चलते आदिवासियों की मुश्किलें बढ़ी हैं. संस्थाओं का आरोप है कि नक्सलियों से निपटने के नाम पर पुलिस को इतने अधिकार दे दिए गए हैं कि उसकी जवाबदेही ही ख़त्म हो गई है.
हिमांशु कुमार कहते हैं, "नक्सली समस्या के चलते राज्य सरकार और अदालतों सहित सभी को लगता है कि सारा दारोमदार पुलिस पर ही और इसलिए किसी भी सूरत में पुलिस को हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए."
एफ़एफ़डीए के सुभाष महापात्र कहते हैं, "पुलिस का आतंक इतना है कि लोग अपनी बात भी खुलकर नहीं कह सकते."
लेकिन पुलिस के अधिकारी कहते हैं कि पुलिस पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और जिसके ख़िलाफ़ भी शिकायत पाई जाएगी सख़्त कार्रवाई की जाएगी.

Wednesday, April 25, 2007